सच मिट्ठा आशिक प्यारे नू

SR_Generic_Hindiचुप्प कर के करीं गुज़ारे नूं

सच्च सुणदे लोक ना सहिंदे नी, सच्च आखिए तां गल पैंदे नी,
फिर सच्चे पास ना बहिंदे नी, सच्च मिट्ठा आशक प्यारे नूं ।
चुप्प करके करीं गुज़ारे नूं ।

सच्च शर्हा करे बरबादी ए सच्च आशक दे घर शादी ए,
सच्च करदा नवीं आबादी ए जेही शर्हा तरीकत हारे नूं ।
चुप्प करके करीं गुज़ारे नूं ।

चुप्प आशक तों ना हुन्दी ए, जिस आई सच्च सुगंधी ए,
जिस माला सुहाग दी गुन्दी ए छड्ड दुनियां कूड़ पसारे नूं ।
चुप्प करके करीं गुज़ारे नूं ।

बुल्ल्हा शौह सच्च हुण बोले हैं, सच्च शर्हा तरीकत फोले हैं,
गल्ल चौथे पद दी खोल्हे हैं, जेही शर्हा तरीकत हारे नूं ।
चुप्प करके करीं गुज़ारे नूं ।

~बुल्ले शाह

 

प्रश्न: तो ये जो चुप्पी की बात हो रही है – एक तो होता है, पाओ और गाओ। और कभी-कभी ऐसा होता है, कि हमने अगर कुछ भी पढ़ लिया, हमें कुछ नयी चीज़ पता चलती है, तो हम अपने सम्बन्धों में बताते हैं कि मुझे ये पता है। तो उसमें कुछ अलग से बात उठ रही है, कि मैं कुछ जानता हूँ। तो क्या उसके लिए ये चुप होना बोला गया है?

आचार्य प्रशांत: किसको कहा गया है चुप रहने को?

श्रोता: अहंकार को। जो मैं जानता हूँ, जो ज्ञान इक्कठा कर रहा हूँ।

आचार्य जी: तो ये समझना ज़रूरी है ना, कि किसको कहा गया है। ये सवाल व्यर्थ है कि सत्य मिल जाए तो क्या करें? सत्य मिल जाएगा तो तुम्हें कुछ करना ही नहीं है, जो करेगा सत्य करेगा। अगर सत्य मिल गया, और अभी भी तुम कुछ कर रहे हो, तो क्या मिला? तो, ये सवाल कि सत्य मिल जाए तो उसके बाद चुप रहें या औरों को बताएँ, ये सवाल फ़िज़ूल है।

सत्य जिन्हें मिलता है, उसके बाद जो करना होता है सत्य खुद कर लेता है, आपको नहीं करना है। चुप रहने को आपको कहा गया है। चुप रहने को आपको कहा गया है, सच को बोलने दीजिये, आप चुप रहिये, इतनी सी बात।

आप बोलेंगे, अपना ही नुकसान करेंगे, औरों का भी नुकसान करेंगे। आप बोलने से रोकेंगे अपने आप को, तो भी नुकसान करेंगे। सवाल, फिर न ‘बोलने’ का होगा, न ‘न बोलने’ का, सवाल होगा कि “आप क्यों कर्ता बने हुए हो?” आपको कर्ता नहीं बनना है। चुप रहना यही है। आप मौन रहें, सत्य स्वयं बोलेगा। उसके पास बहुत तरीके हैं। आप जैसा बोल सकते हैं, उससे वो बहुत अच्छा बोलेगा, बहुत सुंदर बोलेगा, बहुत उचित बोलेगा।

बस इतनी सी ही बात है।

तो जब तक आपको ये सवाल उठ रहा है ना कि मुझे तो पता चल गया है, औरों को बताऊँ कि न बताऊँ, समझ लीजिये कि आपको अभी कुछ पता नहीं चला है!

सत्य का तो अर्थ ही है ना, दुविधा का मिट जाना। आप कह रहे हो, सत्य मिल गया है अब दुविधा है कि इसका करें क्या? कमाल कर दिया! सत्य को ले के संशय है आपके पास कि अब इसका करें क्या?



 सत्र देखें: आचार्य प्रशांत, संत बुल्ले शाह पर: सच मिट्ठा आशिक प्यारे नू (Truth is sweet to the Lover)

निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-


१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998
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