दूसरा जन्म ही असली जन्म है।

किसी कवि ने कहा है कि हम सब गर्भों में जीते हैं। अगर मुझे ठीक से याद है तो कहा है “हम सब घटनाओं के जाये हैं, संदर्भो में जीते हैं, पैदा अभी हम हुए नहीं, हम सब गर्भों में जीते हैं।” कवि इन पंक्तियों में ऋषि बन गया है – “पैदा अभी हम हुए नहीं, हम सब गर्भों में जीते हैं।”

पहला जन्म, देह का जन्म तो ऐसा ही है कि जैसे अभी गर्भ में आए, दूसरा जन्म ही असली जन्म है। दूसरा जन्म है, जानना कि जन्म कहते किसको हैं। दूसरा जन्म है बोध में उतरना। पहला जन्म तो कुछ रखा नहीं है – यंत्रवत प्रक्रिया है, देह से देह मिली, रसायन से रसायन मिला, पुरुष कोशिका से स्त्री कोशिका मिली, और वो काम एक में भी हो सकता है। बिलकुल रासायनिक प्रक्रिया है। हम अच्छे से जानते हैं, परखनली में होती है। उसमें जन्म जैसा क्या है? सोचा नहीं कभी कि जो घटना परखनली में घट सकती है, उसको तुम जन्म कहना चाहोगे? बच्चे परखनलियों में पैदा हो रहे हैं, टेस्ट ट्यूब बेबीज़  सुना होगा।

तुम गर्भ में रखो, या परखनली में रखो, एक ही तो घटना घटी है। रसायन से रसायन, कोशिका से कोशिका –  ये कौन सा जन्म है? ये जन्म नहीं है। द्विज, जिसने दूसरा जन्म लिया हो। मैं उसे पहला जन्म कहूँगा, क्योंकि पहले जन्म को जन्म मान कर के हम बड़ी सहूलियत में जीने लगते हैं, हमें बड़ी आसानी हो जाती है कि जन्म ले तो लिया। नहीं, उससे बेहतर है, कि हम कवि को कहने दें जो उसने कहा, “हम अभी गर्भों में जीते हैं।” बहुत कम लोग हुए हैं, जो वास्तव में जन्म ले पाए।

एक बुद्ध जन्म लेता है, एक कबीर जन्म लेता है, नानक ओर जीसस जन्म लेते हैं। कृष्ण जन्म लेते हैं ओर नाचते हैं।

कुछ साल पहले की बात है, तब तक मेरी कहानी इतनी फैली नहीं थी, तो लोग आ जाते थे बताने कि आज मेरा जन्मदिन है। दो-तीन साल पहले की बात है, तो एक का फ़ोन आ गया – खुद तो करेगा नहीं, मैंने ही कर दिया — मैंने कहा, “क्यों किया भाई?” कहा, “जन्मदिन है, बधाई दे दे।”  मैंने कहा, “ठीक है, कभी जन्मदिन काश तेरा एक ऐसा भी आए, यही मेरा तेरे जन्मदिन पर सन्देश है कि, कभी तेरा कोई जन्मदिन ऐसा भी आये जब तू पैदा भी हो जाए।”

जन्मदिन ही मनाते जाओगे या कभी पैदा भी होओगे? मनाये जा रहे हो, मनाये जा रहे हो जन्मदिन और एक दिन बिना पैदा हुए मर गए। कहे, “हम मर गये।” तो पूछो, “पैदा कब हुए थे?” पैदा हुए नहीं मर गए, बड़ी त्रासदी है। और उतना ही मजेदार चुटकुला भी है – शवयात्रा जा रही है, किसकी? जो अभी पैदा ही नहीं हुआ।



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