जिसने अपना ख़याल खुद रखा वही पाएगा कि गहरे से गहरा नुकसान कर लिया।

कुछ भी संयोगवश नहीं है। पाँच उँगलियाँ भी हैं तुम्हारी, तो पाँच ही होनी थी, छह नहीं हो सकती। पूरी जो शरीर की विकास प्रक्रिया रही है, जिसमे अस्तित्व के एक एक अणु का योगदान है, उसने ये तय किया है कि पाँच उँगलियाँ हों, और इतना कद हो तुम्हारा, और ऐसा रूप रंग हो। ठीक है?

जहाँ इतनी तीव्र समझ है, इतनी गहरी मेधा है कि वो जानते हैं कि तुम्हारे ह्रदय को कैसे आकार देना है, तुम्हारी उँगलियों को कैसे आकार देना है, और जीसस कह रहे हैं कि ये तक वो जानते हैं कि तुम्हारे सिर में कितने बाल होने चाहिए। तो अब तुम्हे फ़िक्र करने कि क्या ज़रूरत है? जो इतनी बारीकी से तुम्हारे विषय में सारी जानकारी और सारी समझ रखता है, उसके होते हुए, तुम क्यों बरगलाए रहते हो? तुम अपना ख़याल करोगे? तुम जानते हो तुम्हारे सर में कितने बाल हैं? तुम्हें क्या ठीक ठीक ये भी पता है कि तुम्हारे शरीर में जो भी प्रक्रियाएँ होती हैं, वो क्या हैं और कैसे होती हैं?

पर कोई और है जो सब जानता है, उसके जाने बिना ये बनता कैसे? किसी शक्ति द्वारा संचालित है, कोई समझ है जिसने इसका डिज़ाइन, इसका खाका खीचा है, और वो तुमसे ज्यादा जानती है तुम्हारे शरीर और मन के बारे में। तो सन्देश स्पष्ट है, काहे को चिंता में भूले जा रहे हो? तुम तो बस एक फ़िक्र करो, अपनी होशियारी से बचा रहूँ, इसके अलावा और कोई चिंता मत करो।

जब पूरा ब्रह्माण्ड मिल कर के तुम्हारा ख़याल रख रहा है, तो सिर्फ एक तरीका है कि तुम्हारा नुकसान हो सके, वो क्या?

जब तुम अपना खयाल खुद रखने लगो। जिसने अपना ख़याल खुद रखा वही पाएगा कि गहरे से गहरा नुकसान कर लिया। और जितना तुम अपने आप को अस्तित्व के भरोसे छोड़ते चलोगे, उतना पाओगे कि फल फूल रहे हो।



पूर्ण लेख पढ़ें: आदमी की होशियारी किसी काम की नहीं