तुम्हें पानी का कुछ पता नहीं लेकिन तुम्हें प्यास का तो पता है

कोई पागल हो गया है| वो भूल गया है पानी का नाम, स्मृति का लोप हो गया है| ठीक? स्मृति का लोप हो गया है। न वो खुद को जानता, न संसार को जानता, पानी को भी नहीं जानता; न खुद को जानता है, न संसार को जानता है, पानी को भी नहीं जानता, न भाषा को जानता है| पा, नी, ज, ल – ये शब्द ही उसकी व्याकरण से गायब हो गया है। इन सब को नहीं जानता तो क्या वो प्यास को भी नहीं जानता? जवाब दो? इन सब को नहीं जानता तो क्या वो प्यास को भी नहीं जानता?

अब प्यास को तो जानता है पर ये नहीं जानता कि कैसे मिटेगी प्यास। नहीं जानता ना? स्मृति गयी, बुद्धि भी गयी। तुम उसे पानी दे देते हो, उसे कुछ नहीं पता उसे क्या दिया गया| अचानक अनायास उसके हाथ एक चीज़ आ गयी है। प्यासे के हाथ एक चीज़ आ गयी है और प्यासे को कुछ पता नहीं उसके हाथ में क्या आया गया है, बिलकुल नहीं पता है। तुम यहाँ तक कह सकते हो कि उसकी इन्द्रियों तक का लोप हो गया है तो वो पानी को देख भी नहीं पा रहा है।

न उसने पानी का कभी नाम सुना है, न उसे पानी जैसे किसी चीज़ की स्मृति है लेकिन प्यास तो है उसके पास और ज्यों ही अब इस अनजानी चीज़ को, बिलकुल अनजानी चीज़ है उसके हाथ में उसे ये भी नहीं पता| उसे ये भी नहीं पता इसे पीना होता है। कोई कहेगा होंठो तक ले जाओ, कोई सहारा देगा कि होंठ तक ले जाओ जैसे बच्चे को देना पड़ता है कि इसको खाते है चलो मुँह तक ले जाओ। आप उसे सहारा देते है कहते हो, “पियो इसको|” मुँह में डालता है, क्या होगा? क्या होगा? बुद्धि उसकी पकड़ पाएगी की प्यास क्यों बुझी? उसके अतीत से कोई गवाही आएगी कि प्यास क्यों बुझी? लेकिन प्यास तो बुझ जाएगी ना।

यही काम मंत्र करते है| तुम्हे मंत्र का कुछ पता नहीं क्या है, क्यों है लेकिन वो किसी ऐसे श्रोत से निकला है कि वो तुम्हारी प्यास बुझा देगा। तुम्हें पता भी नहीं होगा, उसने क्यों बुझा दी और कैसे बुझा दी पर वो तुम्हरी प्यास बुझा देगा।

भला हो कि वो जो पागल व्यक्ति है वो पानी का नाम जान ले। भला हो कि वो ये भी जान ले कि पानी कहाँ रखा है और किस प्रकार हासिल किया जाता है, बहुत अच्छा हो। पर अगर उसे ये सब नहीं भी पता हो और सिर्फ संयोगवश उसे पानी मिल गया है, पानी तब भी उसके काम आ जाएगा। इसीलिए पूछा जाता है कि कैसा लगा? तुम्हे भी शायद संयोगवश पानी मिल गया है। तुमने माँगा नहीं, तुम्हे पानी का कुछ पता नहीं लेकिन तुम्हें एक बात का तो पता है ही, किसका? प्यास का। अब संयोगवश पानी मिल गया है तो प्यास तो बुझेगी ना, फिर भी बुझेगी।



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