संन्यासी वह जो दृश्यों के पीछे का दृश्य देख लेता है, जो शब्दों के पीछे का मौन सुन लेता है|

मूढ़ में और ज्ञानी में यही अंतर है| एक सी तरंगे दोनों के कान में पड़ती हैं| एक कहता है, “यह तो चिड़िया की आवाज है”, दूसरा कहता है, “नहीं परमात्मा बोला”| एक ही दृश्य दोनों को दिखाई देता है एक कहता है, “यह देखो, यह संसार की माया है”, दूसरा कहता है, “माया सो है ठीक, पर हमें कुछ और भी दिख रहा है”| उसी ने देखा जिसको कुछ और भी दिख रहा है| जिसको आप माया कह रहे हैं उसको तो एक कैमरा भी देख लेगा, जिसको आप कह रहे हैं कि आप मेरे शब्द सुन रहे हो उसको तो यह वॉइस रिकॉर्डर भी सुन रहा है|

सुना आपने तभी जब आपने उसको सुना जिसे यह वॉइस रिकॉर्डर नहीं सुन सकता, देखा आपने तब जब आपने उसको देखा जिसे कोई कैमरा नहीं देख सकता, यही अंतर है संसारी में और संन्यासी में| ऐसा नहीं की संन्यासी को शब्द नहीं सुनाई देते हैं, वह सुनता है, पर वो वैसे नहीं सुनता है जैसे यह रिकॉर्डर सुन रहा है|

संसारी वो जो रिकॉर्डर है, संसारी वह जो कैमरा है|

संन्यासी वह जो दृश्यों के पीछे का दृश्य देख लेता है, जो शब्दों के पीछे का मौन सुन लेता है|



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