जग गए हो, ये कहना बड़ी भ्रान्ति है

जग गए हो, ये कहना बड़ी भ्रान्ति है। कोई जग जाता नहीं है। जगने की प्रक्रिया, सतत चेतना की है; कंटीन्यूअस अवेकनिंग। ‘जग गए हो’, जैसे स्टेटमेंट का कोई अर्थ नहीं होता। लगातार जगते रहना होता है। क्योंकि सुलाने वाली ताकतें बहुत हैं।

सुलाने वाली ताकतें बहुत हैं, और लगातार काम कर रही हैं। तो जगना भी लगातार होता है; लगातार। ‘जग गए हो’ जैसा कुछ नहीं है । फिर सो जाओगे ।

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