अहंकार प्रेम न होने देगा

जो आप अपनेआप को समझते हो — ये अहंकार की बड़ी मस्त चाल होती है — अहंकार उससे नीचे भी नहीं चाहता कि आप जाओ और ये भी नहीं चाहता कि आप उससे ऊपर जाओ। समझ रहे हो? वो और घना होना चाहता है उसी क्षेत्र में, जहाँ पर वो पहले से है।

आप अपनेआप को पूरे तरीके से एक पर्सनैलिटी  समझते हो, एक व्यक्तित्व समझते हो, आप बाकी पूरी दुनिया को अपने से नीचे समझते हो, बाकी पूरी दुनिया से मेरा मतलब है जो इंसान नहीं हैं, उनको तो आप अपने से नीचे समझते हो।

तो अहंकार ये बिलकुल नहीं चाहेगा कि आप उनके प्यार में पड़ो और जो आपसे ऊपर का है, वास्तव में ऊपर का है, जो बियॉन्ड ईगो है — जिसको चाहे तुम जो बोल लो टोटल, कम्पलीट, गॉड, परम, खुदा, इंटेलिजेंस; मर्ज़ी है तुम्हारी — अहंकार ये भी नहीं चाहता कि तुम उसके प्यार में भी पड़ो! “अहंकार ना तो तुम्हें उसके प्यार में पड़ने देता है, जिसे तुम क्षुद्र कहते हो और ना उसके प्यार में पड़ने देता है, जिसको वो कहीं न कहीं जानता ही है कि ये अति विराट है।

 


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