धर्म का अर्थ मुर्दा होना नहीं

धर्म को जीवन की अवज्ञा मत बना लीजियेगा। धर्म को, कृत्रिम गंभीरता मत बना लीजियेगा। वयस्कता, प्रौढ़ता, मैच्युरिटी, के नाम पर धर्म को, एक बोझ सा मत बना लीजियेगा।

आम जीवन में आप अपनेआप को पूरा अधिकार देते हैं, हंसने का, खेलने का। आप जब उपनिषदों के साथ भी बैठें, तो अपनेआप को उनसे खेलने का हक़ दें। आप मुझसे बात कर रहे हैं, बीच में कुछ गलत नहीं हो जायेगा, यदि आप ठहाका मार दें। ठहाका नहीं मार सकते, तो कम से कम मुस्कुरा ही दीजिये।

धर्म का मतलब मुर्दा हो जाना नहीं है। लेकिन मैं देखता हूँ, कि धार्मिक आयोजनों में अधिकांशत: वही लोग जुड़ते हैं, जो या तो मर चुके होते हैं, या जिनकी मरने की पूरी तैयारी होती है।


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