ग्रन्थ सिर्फ़ शांत मन को ही समझ आते हैं

दो तरह के लोग होते हैं जो किसी धर्म ग्रन्थ का अर्थ करते हैं, एक वो जो वही धर्मावलम्बी हैं, वो अनर्थ करेंगे पक्का, और दूसरे वो जो विरोधी हैं। कुरान को आप ऐसे लोगों के हाथ में दे दीजिये जो इस्लाम को नहीं पसंद करते, वो कुरान का ऐसा भयानक अर्थ निकालेंगे, कि देखो ये तो बड़ा ही गिरा हुआ ग्रन्थ है। एक तरफ वो लोग बैठे हुए हैं जो कहेंगे कि हम तो बिलकुल डूबे हुए हैं श्रद्धा में और देखो इसका ये अर्थ है। वो भी उल्टा-पुल्टा अर्थ कर रहे हैं, दूसरी ओर वो लोग बैठे हुए हैं जो गहरायी से नफरत में डूबे हुए हैं, वो भी उल्टा अर्थ करेंगे। समयक अर्थ करने के लिए आपको न तो विश्वाशी होना है ना अविश्वाशी होना है, आपको ध्यानस्थ होना है। बड़े गौर से, बड़े शांत चित्त के साथ उसमें उतरना है, तब जा कर के पता चलता है कि बात तो इतनी दूर की थी।


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