कौनसा कर्म सही?

अगर सत्य को सबसे ऊपर रखोगे तो कहोगे वो सबसे ऊपर; आगे का वो तय करेगा। काम-धंधे चलने होंगे तो चलेंगे और नहीं चलने होंगे तो ठप पड़ जाए। प्रथम वरियता तो उसको है ना। आगे की वो जाने और हमें क्या पता कि हमारे लिये कौन सा काम उचित है। जो सत्य में नहीं है जो झूठ में है वो काम भी कैसे कर रहा होगा? तो अभी तो मैं यह भी नहीं जानता कि काम कौनसा ठीक। सत्य में आने के बाद ही तो पता चलेगा कि करने लायक काम है भी कौनसा है।


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