आनंद क्या है?

बोध में न कुछ अच्छा होता है, न बुरा होता है। ‘आनंद’, अच्छा लगने की अवस्था नहीं होती। इसीलिए इतनी बार कहता हूँ कि ‘आनंद मज़ा नहीं है। ‘आनंद’ अच्छा नहीं लगेगा। ‘आनंद’, ध्यान से अगर देखो, तो बस अनुपस्थिति है, अच्छे लगने की भी और बुरे लगने की भी। और चूँकि वही शुन्यता, वही खालीपन तुम्हारा स्वभाव है, इसीलिए मन, ‘आनंद’ की अवस्था में पीड़ा नहीं अनुभव करता। 


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