अष्टावक्र-जनक महासंवाद

शास्त्रों का निरंतर अध्ययन आध्यात्मिक वर्धन हेतु बहुत महत्वपूर्ण होता है।

सभी प्राचीन शास्त्र, जैसे उपनिषद्, गीता इत्यादि वर्तमान समय में बहुत महत्व रखते हैं।

ये कहना कोई अतिश्योक्ति न होगी कि संतों और शास्त्रों के सानिध्य बिना जीवन सरासर व्यर्थ है।

आज अगर प्रकृति प्रलय के कगार पर है, समाज में हर दिशा में हिंसा व्याप्त है, तो उसका एक मात्र कारण यही है कि मनुष्य का मन अंधकार और अज्ञानता में विलीन हो चुका है।

आचार्य प्रशांत के सानिध्य में आयोजित, संत अष्टावक्र और राजा जनक के महासंवाद पर दीक्षा,  इस श्रृंखला का तीसरा चरण है। यह संसार में बोध के प्रकाश को स्थापित करने की दिशा में एक बहुत प्रमुख प्रयास है।

इस श्रृंखला में प्रमुख शास्त्रों में से कुछ चुनिंदा वक्तव्यों पर गहन अध्ययन किया जाएगा और हमारी रोज़-मर्रा के वास्तविक घटनाओं से इनका सम्बन्ध समझाया जाएगा। अनंत काल से चले आ रहे इन सभी शास्त्रों के रहस्य पर से आचार्य प्रशांत द्वारा आवरण हटाने के इस सुनहरे अवसर को न छोडें।

आचार्य जी, इन सभी सत्रों में स्वयं मौजूद होंगे। सभी सत्र, अद्वैत बोध्स्थल, नॉएडा में होंगें। सभी सत्र ऑनलाइन स्काइप पर भी उपलब्ध हैं।

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आवेदन भेजने हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com पर

दिनांक:  7 चुनिंदा दिवस 6 अप्रैल से  24 अप्रैल के बीच

समय: सायं 7 बजे से 9 बजे

स्थान: अद्वैत बोधस्थल: तीसरी मंजिल, जी-39, सेक्टर-63, नॉएडा

श्रृंखला का समय: 840 मिनट

अन्य जानकारी हेतु संपर्क करें:

श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240


सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़नhttp://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट https://goo.gl/fS0zHf