संत विशिष्ट नहीं, सहज

कबीर ने कोई बड़ा काम नहीं कर दिया कि किसी ऐसे को देख लिया है, जो आपको दिखाई नहीं पड़ता।

कबीर ने तो बड़ा सहज काम किया है, कबीर ने उसको देख लिया है जो- चहुँ दिस है। मछली अगर कहे, ‘’मालूम है, आज बड़ी खोज की, आज पानी देखा।’’ तो आप क्या बोलोगे? ‘’चल पगली, पानी देखा! उसी में जीती है, पीती है, खाती है, कह रही है पानी देखा।’’

पर मछली के लिए इससे क्रांतिकारी खोज हो नहीं सकती कि वो पानी देख ले। मछली के लिए इससे बड़ी कोई कठिनाई हो नहीं सकती कि वो समुद्र को जान ले।


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