धर्मो का पालन ना करना ही असली धर्म है।

सारे धर्मो का परित्याग कर दो, धर्मो का परित्याग करो, धार्मिक हो जाओ। धर्मो को छोड़ो, धार्मिक हो जाओ। बात समझ में आ रही है? और धार्मिक वही हो सकता है, जिसने धर्मो को छोड़ दिया। ठीक वही बात यहाँ पर कह रहे है, कर्तव्यो को छोड़ो, और जो एकमात्र कर्तव्य है, जो तुम्हारा एकमात्र दायित्व है उसको पूरा करो, तुम्हारा एकमात्र दायित्व है? योग। मुझमें आकर मिल जाना, मुझमें लीन हो जाओ इसके अलावा तुम्हारा कोई कर्तव्य ही नहीं है।


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