मन अँधेरे में क्यों?

प्रकाश आपके भीतर ही है, पर वो प्रकाश आपको नहीं उपलब्ध है।

आपकी आँखों से पूरा जग प्रकाशित हो रहा है, पर अपना ही मन नहीं प्रकाशित हो रहा। आपको क्या लगता है कि ये रोशनी सूरज की रोशनी है ?

नहीं, सूरज की रोशनी नहीं है, वो आपकी रोशनी है। मज़े की बात ये है कि आप इतने रोशन हैं कि आपकी रोशनी से सूरज चमक रहा है, और जो इतना रोशन है, उसके भीतर अँधेरा है।

आपकी रोशनी से पूरी दुनिया प्रकाशित हो रही है, बस आप ही प्रकाशित नहीं हो रहे। ये पूरा संसार क्या है, ये आपका ही विस्तार है। इसे आपने ही जगमगा रखा है। बस अपनेआप को ही नहीं जगमगा रखा।


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