नए कि आकांक्षा पुराने को कायम रखेगी

जिन्हें वास्तव में नया चाहिए, वो नए कि आकांक्षा न करें।

नए कि आकांक्षा पुराने को कायम रखेगी।

नए कि आकांक्षा तुरंत नए को एक रूप दे देती है, एक आकार दे देती है, एक सीमा दे देती है। और फिर नए को जो रूप दिया गया है, आकार दिया गया है, सीमा दी गई है, ये जानना तुम्हारे लिए सहज होना चाहिए कि वो सब कुछ तुम्हारी ही कल्पना, स्मृति और अतीत से आ रहा है। फिर नए का निर्धारण पुराना कर रहा होता है इसलिए नए को नया कह ही नहीं सकते। उस नए को नया कहना भूल होगी।


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