समर्पण, कमजोरी का नाम नहीं

घुटने टेकने का नाम नहीं है समर्पण, हारने का नाम नहीं है समर्पण, कमज़ोर हो जाने का नाम नहीं है समर्पण।

समर्पण का अर्थ है, ‘’मैंने अपनी कमज़ोरी को समर्पित किया; अब मैं मात्र बल हूँ।’’ समर्पण का अर्थ होता है: असीम ताकत।

समर्पण का अर्थ ये नहीं होता कि, ‘’मैं छोटा हूँ, नालायक हूँ, बेवकूफ़ हूँ।’’ समर्पण का अर्थ होता है कि, ‘‘मेरे भीतर जो नालायकी थी, मेरे भीतर जो क्षुद्रता थी, मैं जो पूरा का पूरा ही कमजोरियों का पिंड था; मैंने इसको छोड़ा, मैंने इसे समर्पित किया।’’ यह होता है समर्पण।

समर्पण का ये अर्थ मत समझ लेना कि कहीं जा कर के अपनेआप को प्रस्तुत कर देने का नाम समर्पण है, परिस्थितियों की चुनौती का जवाब न दे पाने का नाम समर्पण है, जीवन से हारे-हारे रहने का नाम समर्पण है। ये सब समर्पण नहीं है, ये तो कमजोरियाँ हैं, बेवकूफ़ियाँ हैं।


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