माया बहरूपिया

तुम फँस गए हो, और माया किसी की भी शक्ल लेकर आ सकती है। क्यों सोचते हो कि माया किसी कामिनी स्त्री की ही शक्ल लेकर आएगी। माया एक छोटे से बच्चे की शक्ल लेकर भी आ सकती है, आती ही है। समझ क्यों नहीं पा रहे हो?

जिसकी जहाँ आसक्ति, माया वैसी ही शक्ल ले लेगी।

कोई क्यों सोचता है कि माया बहुत सारे सोने की, बहुत सारे पैसे की या कामेच्छा की ही शक्ल लेकर आएगी। माया, ममता की शक्ल लेकर बैठी हुई है। माया, कर्तव्य की शक्ल लेकर बैठी हुई है। लिफ़ाफ़े को फाड़ कर जब देखोगे, तो भीतर असली बात पता चलेगी।


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