‘नरक’ के कारण होते हैं; ‘स्वर्ग’ कृपा होती है

सौ साल भक्ति कर के यदि कोई फिसलता है, तो पक्का है कि भक्ति झूठी थी, इसी कारण फिसले। पर अगर कोई सौ साल नरक जैसा जीवन जी करके, एक दिन अचानक जग जाता है, तो ये मत समझ लेना कि जग इसलिए गया क्योंकी वो नरक जैसा जीवन जीया।

‘फिसलने’ के कारण होते हैं, ‘उठना’ कृपा होती है। कारण और कृपा में भेद करना सीख लो। ‘नरक’ के कारण होते हैं, ‘स्वर्ग’ कृपा होती है।

तो सौ साल भक्ति करके, अगर फिसल गए हो, तो कार्य कारण का सम्बन्ध चलेगा। तुम्हारा फिसलना इस बात का सबूत है कि पिछले सौ साल भी झूठे थे।


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