अहंकार सीमितता का एहसास है

अहंकार जब भी घोषणा करता है, तो अपने सीमित होने की ही करता है। अहंकार की प्रत्येक घोषणा, बस इतनी सी है, ‘’मैं छोटा हूँ। मैं छोटा हूँ और इस बात से डरता हूँ। इस कारण मैं अपने आपको थोड़ा बढ़ा-चढ़ा कर बता रहा हूँ।’’

अहंकार अपने छोटे-पन का एहसास है। अहंकार अपनी सीमितता का एहसास है।

कृष्ण उस एहसास से ऊपर उठ गए हैं तो इसलिए कृष्ण इस ‘मैं’ शब्द का बड़े निरहंकारी रूप में प्रयोग कर रहे हैं। जब कृष्ण बोलते हैं ‘मैं’, तो फिर कृष्ण नहीं हैं, ‘मैं’। वो समस्त अस्तित्व की बात कर रहे हैं। जो कृष्ण का ‘मैं’ है, यह कोई शरीर में सीमित ‘मैं’ नहीं है। यह वो ‘मैं’ है, जो पूरे अस्तित्व में व्याप्त है, फैला ही हुआ है। धूल-धूल में फैला हुआ है और यह काम एक अहंकारी आदमी नहीं कर सकता।


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