देह भाव का अर्थ ही है निरंतर मौत का भय

देह होने का अर्थ ही यही है कि समस्त जीवन का एक ही औचित्य रह जाएगा: मौत से बचना, क्यूंकि जीवन की निष्पत्ति मात्र मृत्यु ही है देह के लिए।

देह और कहीं को जा ही नहीं रहा, देह सिर्फ़ मौत की ओर जा रहा है और आप मरना नहीं चाहते। अब आप जो कुछ भी करोगे, आप की सांस-सांस में सिर्फ़ मौत का भय होगा।

आप अपने आस-पास के संसार को देखिए, उनकी गतिविधियों को देखिए, आप पाएँगे कि सब कुछ सिर्फ़ मौत के भय से चालित है; आप दुनिया के विस्तार को देखिए, आपको उसमें सिर्फ़ मौत का विस्तार दिखाई देगा।


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