सत्य पदार्थ नहीं, इन्द्रियों के परे है

प्रेम को आप आँख से देख नहीं पाएंगे। आनंद को आप हाथ से पकड़ नहीं पाएंगे। मुक्ति का आप कोई चित्र नहीं बना सकते।

सत्य का कोई नाम नहीं होता लेकिन ये हैं, और यही वास्तविक हैं। जीसस  कह रहे हैं, इन्हीं की दुनियां मे तुम आखिरी रहोगे। जो द्वैत की दुनिया में अव्वल है, वो अद्वैत की दुनिया में आखिरी रहेगा। ना उसे सत्य मिलेगा, ना प्रेम मिलेगा, ना आनंद, ना मुक्ति।
जो खूब पदार्थों के पीछे भाग रहा है, जो खूब प्रतिष्ठा कमा रहा है, जिसने ज़मीन को, पत्थर को और आसमान को, इन्हीं को सच मान लिया है, वो असली दुनिया में, अपनी भीतरी दुनिया में — जहाँ उसका घर ही है — वहां वो तड़पेगा, वहां उसे कुछ न मिलेगा, वहां वो कतार में आखिरी नज़र आएगा।


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