समझ बिना ऊर्जा दिशाहीन

समझ के बिना उस ऊर्जा को दिशा नहीं दी जा सकती|

जिन भी लोगों को जीवन में उत्साह चाहिए, एनर्जी चाहिए, उन्हें उत्साह की फ़िक्र छोड़ देनी चाहिए और समझने की फ़िक्र करनी चाहिए।

उनको ये देखना चाहिए ध्यान से कि, ‘’क्या मैं समझ रहा हूँ कि मेरे साथ क्या हो रहा है? क्या मैं ठीक-ठीक समझ पाया हूँ कि मैं क्या कर  रहा हूँ?  मेरे मन में क्या चल रहा है, क्या मुझे पता है ठीक-ठीक?’’ आप आलस की फ़िक्र छोड़ ही दीजिये, आप बस ये देखिये कि, ‘’मैं जो कर रहा हूँ, मुझे उसकी समझ कितनी है|’