विचार नहीं वास्तविकता

विचार वास्तविकता का विकल्प बन जाता है।

ये ही तो हम करते हैं न अपनी कल्पनाओं में? जो हम वास्तविकता में नहीं कर पाते, हम उसकी कल्पना करना शुरू कर देते हैं। ये ही है न? विचार वास्तविकता का विकल्प बन चुका है।

तुम्हारी जो ऊर्जा सीधे कार्य में निकलनी चाहिए थी, वो ऊर्जा फ़ालतू ही कल्पना करने में जा रही है। ये उस ऊर्जा का विरूपण है। 


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