निजताअविभक्त है

निजता यही है कि उसको जान लिया जो मेरा नहीं है। ये जानना ही निजी है।

अविभक्तता यही है कि उसको जान लिया जो बाहर से आया है, ये जानना ही सब कुछ है।

ध्यान रखिएगा लेकिन कि ये जानना, विचार करना नहीं है। इस जानने का अर्थ नहीं है कि आपने विचार करना शुरू कर दिया कि “मैं ‘मैं’ हूँ, मैं समझ हूँ, मैं बोध हूँ, मैं इंटेलिजेंस  हूँ।” ये विचार नहीं है, ये कोई भाव नहीं है, ये कोई इन्ट्यूशन नहीं है।

ये सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर है, इसका होना न होने के बराबर है। ये आपके जीवन की एक एक तस्वीर को रंग देगा, लेकिन खुद कभी नजर नहीं आएगा। ये रौशनी की तरह है, जो सब कुछ दिखाती है पर खुद कभी नज़र नहीं आती।


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