स्वप्न तो स्वप्न ही है

जब इस पूरे खेल का तत्व ही छल है तो उसकी बारीकियों में क्या जाना?

जब पता ही है कि जो पूरी छवि आपके सामने लाई जा रही है, वो छवि ही, स्वप्न मात्र है। तो फिर उस स्वप्न में कौन-कौन से चरित्र हैं, इस पर क्या ध्यान देना? इन बारीकियों पर क्या गौर करना? ”बड़ा जबरदस्त सपना चल रहा है,” है तो सपना ही?

क्या करोगे याद कर के कि सपने में कौन-कौन था और उससे तुम्हारा क्या सम्बन्ध था? जो भी हो, जैसा भी हो, है तो सपना ही।


पूरा लेख पढ़ें: http://tinyurl.com/jtpxq2z