उसकी आशनाई सब के लिए नहीं है

उसकी आशनाई सब के लिए नहीं है। जो दोनों ओर से मारे जाने को तैयार हों, वही कदम बढाएं।

पहली समस्या भीतर-भीतर होगी, तुम्हारे लक्ष्य बदलेंगे, तुम्हारा होना बदलेगा, तुम्हारे विचार बदलेंगे, पसंदें बदलेंगी, ज़रूरतें बदलेंगी, उपलब्धियों का ख्याल बदलेगा;

और दूसरा बदलाव बाहर होगा, दुनिया वालों के साथ रिश्ते-नाते बदलेंगे। लोगों का देखने का तरीका बदलेगा।

और दोनों ही तरफ़ उलझन है, क्योंकि बहुत लम्बा समय तुम यूँ ही जीए हो, ऐसे ही, एक तरीके से। वो तरीका झूठा था, पर चला लम्बा है। अब जब सच सामने आता है तो उसके सामने एक लम्बा फैला हुआ विस्तृत झूठ है। और झूठ जितना लम्बा-चौड़ा हो गया होता है, उसमें तुम्हारे दांव उतने ही ऊँचे हो गए होते हैं। तुम्हारे स्वार्थ उसमें उतने ही गहरा गए होते हैं, तुमने उसमें गहरे निवेश कर दिए होते हैं, निवेश।

तुम बीस-साल से एक रिश्ते को खाद और पानी डालते आ रहे थे, आज तुमको दिखाई दिया, उसमें जड़ ही नहीं थीं। तुम बीस-साल से एक ऐसे पौधे को सींच रहे थे जो बिना मूल का है, तुम्हारा निवेश है। बीस-साल तुमने उसमें लगाये हैं। दिक्कत तो होगी, डर तो लगेगा। तुम कहोगे: जो दिखता है, नकली ही दिखता है।