माया के रूप

माया किस रूप में तुम्हारे मन में घुसी है, ये जानने का — मैं दोहरा रहा हूँ — यही तरीका है कि देख लो कि दिन रात किसके बारे में सोच रहे हो?

तुम समाज सेवा के बारे में सोच रहे हो, तो माया समाज सेवा बन के आ गई है। तुम धर्म के बारे में सोच रहे हो तो, माया धर्म बन के आ गई है। इसीलिए लाओ त्सू  तुमसे कहता है न कि जब प्रेम नहीं होता तो प्रेम के बारे में सोचते हो। जब धर्म नहीं होता तो धर्म के बारे में सोचते हो।

जिस धर्म के बारे में सोचा जाए वो धर्म, धर्म नहीं माया है। जिस प्रेम के विषय में सोचना पड़े, और जो मन में उमड़ता-घुमड़ता रहे, वो प्रेम नहीं है माया है। 


 

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