उत्कृष्टता किसी ख़ास कृत्य सीमित नहीं

तुम किसी ख़ास कृत्य में उतकृष्ट नहीं होते।

जीवन या तो उतकृष्ट होता है या तो सूना-सूना। इस चक्कर में मत पड़ो कि मुझे ये नहीं, ये मिलेगा, तब जाकर के मेरे जीवन में रौशनी आएगी। मुझे कुछ ख़ास करने को मिले, तब मैं उसमें चमक पाऊंगा।

जहाँ हो जो कर रहे हो, उसी में डूबो और फिर वहाँ से हज़ार रास्ते खुलेंगे। हज़ार रास्ते खुलेंगे।

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