आशा और ममता: नास्तिकता की निशानी

आशा नास्तिकों का काम है, वैसे ममता भी किसी नास्तिक का ही काम होगा।

जिसमें श्रद्धा है, जो परम से संसर्ग में है, उसमें ममता हो ही नहीं सकती। आशा देखती है भविष्य की ओर और ममता देखती है, दूसरों की ओर। दोनों में से कोई भी नहीं है, जो अपनी ओर देखता हो, जो परम की ओर देखता हो, जो सत्य की ओर देखता हो। आशा ने और ममता ने दोनों ने ही बड़े सस्ते विकल्प ख़ोज लिए हैं। दोनों ने ही दो बड़े सस्ते झूठ ख़ोज लिए हैं।

आशा कर्म कराएगी भविष्य के लिए और ममता कर्म कराएगी दूसरे के लिए और जब तक ममता की वस्तु मौजूद रहेगी तब तक सारे कर्म बस उसके लिए होंगे, और गहरे कर्म में लिप्त होना ही पड़ेगा।