समय का स्रोत

जब हम कहते हैं ‘स्रोत है’, तो ये मत समझ लीजिएगा कि स्रोत कोई ऐसी चीज़ है जिसने दुनिया बना कर के छोड़ दी है। स्रोत का मतलब ये है कि वो समय का स्रोत है, और समय क्योंकि लगातार है, इसीलिए वो भी लगातार है। वो लगातार बना ही रहा है। एक लगातार चल रही प्रक्रिया है। तो भगवान क्या है? वह लगातार घट रही प्रक्रिया है। और बुद्ध एकदम यही कहते थे, बुद्ध कहते थे कि दुनिया में चीज़ें हैं ही नहीं, सिर्फ़ प्रक्रियाएं हैं। जो तुमको दिखाई पड़ता है कि ‘है’, वो है नहीं। इसीलिए उन्होंने जीवन को नदी कहा है। नदी होती नहीं है, नदी एक प्रक्रिया है। तुम उसे नाम दे देते हो कि नदी है, पर नदी नहीं है, एक प्रक्रिया है बहने की। नदी का बहाव दिखाई पड़ता है इसीलिए आसान है उदाहरण दे पाना, पर जीवन भी वैसा ही है, सब कुछ वैसा ही है।