सुधार नहीं विघलन

भूल का कोई सुधार नहीं होता।

कोई आकस्मिक गलती नहीं हुई है – आप जो हो आपसे यही होना था। संयोगवश धोखा नहीं हुआ है, आप जो हो आप बार-बार यही करोगे।

आपके रहते भूल सुधारी नहीं जा सकती, सुधारने की कोशिश मात्र एक प्रपंच है।

भूलों से भरे जीवन को देख अपने मन का ज़रूर पता लग सकता है – यह आत्मज्ञान होता है। आत्मज्ञान में मन, कर्म, जीवन स्वयमेव बदल जाते हैं।