पढ़कर नहीं जानकर

किसी ने उगता हुआ सूरज देखा। किसी ने बरसात का सूरज देखा।

किसी ने अमेरिका में बैठकर देखा। किसी ने अफ्रीका में बैठकर देखा। और सबने देखा सूरज लेकिन आधा-तिरछा देखा या किसी माध्यम से देखा।

अब जो देखने वाले थे, वो चले गए। जिन्होंने देखा था, वो चले गए। उनकी लिखी किताबें बची हैं। किताबों में ज़िक्र किसका है- ‘सूरज का और चश्मे का’। सूरज तो पढ़ने वाले जान नहीं पाते क्योंकि सूरज तो बताने की चीज़ नहीं है।

सूरज तो अनुभव करने की चीज है। सूरज तो जान नहीं पाते। हाँ, चश्मे को जान जाते हैं।