करनी के दो स्रोत: गुरु और चेला

करनी के दो अलग अलग स्रोत हैं: गुरु और चेला, आत्मा और मन।

गुरु का कर्म: निष्काम कर्म; चेले का कर्म: सकाम कर्म।

कर्म का उद्गम यदि गुरु है तो चेला कर्ता भासित भले ही होगा, पर कर्म निष्काम होगा।