असली प्रेमी कौन?

प्रेम का अर्थ- एक ऐसा मन जिसकी गति सदा आत्मा की तरफ है।

प्रेमी जीवन के सब रंगों से गुज़रता है, पर आत्मा की ओर उन्मुख।

आत्मा, सत्य के साथ रहना ही प्रेम है। यदि तुम्हारा प्रेम सत्य से घबराता है, तो वो प्रेम आसक्ति है, छल है मात्र।

आत्मा की पुकार और संसार की आसक्ति के बीच इंसान अटका रहता है, जीवन भर।