इच्छाशक्ति है मन की अकड़, आत्मबल है मन का समर्पण।

आत्मबल इच्छाशक्ति नहीं है। इच्छा नहीं होती आत्मबल में।

जब तक इच्छा का ज़ोर लगाओगे, तब तक आत्मबल की असीम ताक़त को नहीं पाओगे।

इच्छाशक्ति है मन की अकड़, आत्मबल है मन का समर्पण।

जब व्यक्तिगत इच्छा को ऊर्जा देना छोड़ते हो तब समष्टि का बल तुम्हारे माध्यम से प्रवाहित होता है- वह आत्मबल है।