आनंद की तलाश

तुम बार-बार आनंद की ही तलाश करते हो क्योंकि तुम्हारे मर्मस्थल में याद बसी है उसकी

जैसे कोई बचपन में ही घर से बिछुड़ गया हो, और उसे घर की, माँ की, धुंधली-सी स्मृति बुलाती हो।

आनंद की तलाश तुम्हें इसलिए है क्योंकि आनंद तुम्हारा घर है, स्वभाव है। उसके बिना चैन कैसे पाओगे तुम?

पैसा, इज्ज़त, उपलब्धियाँ – इनके साथ भी विकलता बनी ही रहेगी। माँ का विकल्प खिलौने नहीं हो सकते।