प्रेम – न सामाजिक, न नैतिक

आम मन समाज और नैतिकता से भरा होता है। इसी कारण उसमें प्रेम के लिए कोई जगह नहीं होती।

प्रेम न सामाजिक होता है न नैतिक होता है। प्रेम बस आध्यात्मिक होता है।