हरि तक कैसे पहुँचें?

अपने अनन्त स्वभाव से दूर जाना ही हरि से दूरी है।

सीमा खींची नहीं कि हरि से दूरी हो गयी।

इसीलिए हरि तक पहुँचने के लिए सीमाओं का उल्लंघन नहीं करना है, अपितु सीमाओं को मिटाना है।

जैसे ही कहा कि कुछ द्वार हरि के हैं, आप यह कह रहे हो कि बाकी सारे द्वार हरि के नहीं हैं। आपने हरि को भी विषय बना लिया, आपने हरि को विशिष्ट बना दिया। अब हरि से प्रेम मिलना असंभव है।