सवालों का जंगल

यह पूरा जो सवालों का जंगल है ना, हममें से कोई नहीं है जो इसे साफ़ कर सके।

सिर्फ़ एक बोध है जो इसको बिल्कुल हटा देगा, वो यह कि – ‘दूसरे हैं नहीं। ‘

सब एक आत्मा का प्रकाश है।

जब तक तुम इस बोध में जीना नहीं शुरू करते, जब तक ‘दूसरे’ हैं,

जब तक संसार अपने पूरे वैविध्य के साथ तुम्हारे सामने खड़ा है,

तब तक यह सवाल बाकी ही रहेंगे और बढ़ते ही जाएँगे।

कहा न कि पूरा जंगल है।

इस जंगल के तुम कितने पत्ते, डाल, टहनियाँ काटोगी?

इस पूरे जंगल के मूल में जाओ।

‘दूसरे’ हैं नहीं, अपने मन पर ध्यान दो, उसको आत्मा में स्थापित रखो।

जब तक ‘दूसरे’ हैं, तब तक इस तरह के सवाल बचे रहेंगे, और परेशान रहेगी।