मन की विक्षिप्तता; ह्रदय की पूर्णता

क्यों आपको खुला आसमान भाता है?

पक्षी की उड़ान क्यों आपको निस्तब्ध कर जाती है?

इनका कोई कारण नहीं है।

चलते-चलते अचानक ठिठक के खड़े क्यों हो जाते हैं?

अनायास प्रेम क्यों पकड़ लेता है आपको?

 

मन सोच-सोच कर भी कुछ पता नहीं लगा पाएगा।

दुनिया की सारी सहूलियतें मिली रहें, आपको लेकिन फिर भी आजादी क्यों प्यारी होती है?

मन इसका कोई कारण नहीं जान पाएगा।

यह ‘ह्रदय’ है।