जीवन बोझ क्यों?

जीवन ने कोई ठान नहीं रखी है कि तुम्हें दुःख देगा।

अस्तित्व इसलिए नहीं है कि तुम्हें परेशान रखे।

तुम यातना भोगने के लिए थोड़े ही पैदा हुए हो,

पर फिर भी तुम पाते हो कि जीवन बिल्कुल बोझ जैसा है।

रोज़ दो आँसू रो लेते हो।

इससे यही सिद्ध होता है कि भ्रमित हो।

कुछ तो तुमने मन में ऐसा बैठा रखा है जो अवास्तविक है।

नकली में जी रहे हो, इसीलिए कष्ट पा रहे हो,

अन्यथा किसी का कोई इरादा नहीं है तुम्हें कष्ट देने का।