भगवान क्या हैं ?

श्रोता – मेरा सवाल है कि कहते हैं भगवान सच है; तो सर ,झूठ क्या है और वो क्यों है इस धरती पर ?

वक्ता – अगर तुमने पहला वाक्य जान कर बोला होता तो दूसरा प्रश्न शेष ही नहीं रह जाता l तुमने कहा भगवान् सच्चे हैं पर न तो तुम्हे भगवान् का कुछ पता न ही सत्य का कुछ पता l भगवान् सच्चे हैं -ये तुम्हारे लिए एक सुनी सुनाई बात है l इसमें तुम्हारी अपनी देशना, अपना जानना, ज़रा भी नहीं है l कुछ है क्या इसमें ?

तुम्हारे लिए भगवान् बस एक नाम है l और अगर तुम अलग अलग धर्मों को मानने वाले यहाँ बैठे हुए हो तो उस नाम के साथ छवियाँ भी अलग अलग जुडी हुई हैं l नाम भी अलग अलग हो जायेंगे l वो इस पर निर्भर करता है कि तुम्हारे घर में कौन से देवी -देवता पूजे जाते हैं l देश के किस हिस्से से आ रहे हो l किस जात के हो, किस संप्रदाय के हो l

भगवान् को तो तुमने इसके अलावा कुछ जाना नहीं है l

भगवान् महत्वहीन है; जानना महत्वपूर्ण है l ये जो प्रश्न है भगवान् के बारे में इसे हमको थोडा विस्तृत करना पड़ेगा l ठीक वैसे ही जैसे हमने भगवान् को कुछ नहीं जाना पर बचपन से ही क्योंकि हम सुनते आ रहे हैं कि भगवान् हैं और सत्य हैं, तो हमने कुछ मान रखा है, इसी तरीके से जीवन में हमने सब कुछ बस मान ही रखा है l

हम बिलकुल भी नहीं जानते हैं कि करिअर शब्द का क्या अर्थ होता हैl हम बिलकुल भी नहीं जानते है कि जीवन जीने का क्या अर्थ है l शादी का क्या अर्थ है l प्रेम का क्या अर्थ है l आनंद क्या है l इन सबको हम बिलकुल नहीं जानते l पर हमने सुन रखा है इनके बारे में जिसको हमने कुछ मान लिया है l भगवान् भी इसी तरीके के शब्दों में से एक है l

स्वतंत्रता क्या है, हम नहीं जानते l सत्य क्या है, हम नहीं जानते l शिक्षा क्या है, हम ये भी नहीं जानते l मैं कौन हूँ, ये तो बिलकुल ही नहीं जानते l पर इन सब बातों के बारे में हमने कुछ कुछ सुन रखा है और इनको मान लिया है l तो इस प्रश्न को अलग से लेकर के नहीं देखा जा सकता कि भगवान् क्या है, सत्य क्या हैl

जीवन में जब बाकी सब कुछ तुम अपनी समझ से जानोगे तब ये भी जान जाओगे कि इस भगवान् नाम की चीज़ का क्या अर्थ हैl अभी तो तुम कुछ नहीं जानते l अभी तो तुम बस एक सुना-सुनाया जीवन बीता रहे हो l तुमने सुन लिया है कि पढाई कर लेनी चाहिए, अभी तक तुम्हारे साथ जो कुछ भी हुआ है वो बिलकुल एक -बंधी बंधाई रवायत के अनुसार हुआ है l

दसवीं तक पढ़े, सब पढ़ते हैंl उसके बाद फिर थोड़ा और पढ़े, सब पढ़ते हैंl उसके बाद फिर आजकल चलन है इंजीनिरिंग का, तो वो भी कर रहे हो l आगे भी जो कुछ होना है उसकी भी पटकथा लिखी ही जा चुकी है – उसी के अनुरूप होगा सबकुछ l यहाँ से निकलोगे तो एमबीए कर लोगे, गेट दोगे नहीं तो घर चले जाओगे, माँ-बाप के काम धंधे में हाथ बंटाओगे l

या तो कोर ब्रांच में जाओगे नहीं तो सॉफ्टवेयर में चले जाओगे l फिर शादी कर लोगे, फिर बच्चे पैदा करोगे, फिर अपनी जिंदगी खराब करोगे, फिर एक दिन मर जाओगे l ये सब जो है इसमें तुम्हारी समझ कहाँ पर है ये बता दो ?

ये सब एक -सुने सुनाये तरीकें से, एक बंधे -बंधाये तरीके से जीवन चल रहा हैl अब इस पूरे जीवन में, इस पूरी बंधी -बंधाई स्क्रिप्ट में, पटकथा में, एक कैरक्टर आर्टिस्ट का नाम भगवान् भी है l वो बीच में कभी-कभार आ जाता है l कब आ जाता है ? होली पे आ जाता है, दिवाली पे आ जाता है l जन्मदिन पर आ जाता है, परीक्षा वाले दिन आ जाता है l जैसे कहानी चल रही हो और बीच-बीच में एक किरदार आता हो, दो-चार डायलाग मार के गायब हो जाता हो l होते हैं ऐसे किरदार!

तो तुम्हारी पूरी कहानी में इस तरह के किरदार का नाम है भगवान् l और तुम किस जात के हो, उस हिसाब से उसका एक सरनेम भी है l भगवान् सिंह, नहीं तो भगवान् शर्मा। नहीं तो भगवान् गुप्ता, भगवान् पटेल l जो नाम देना चाहो, अपने -अपने भगवान हैं, मर्ज़ी ! और अगर तुम लड़की हो तो फिर भगवती l कोई दिक्कत ही नहीं है l

ये भगवान् तो तुम्हारी अपनी कल्पना है, इसे तुम जब चाहते हो घुसेड़ लेते हो, कि आ! अभी तेरी ज़रूरत हैl और बाद में अगर नहीं है ज़रूरत- तो फिर चलो ! गेट उधर है l अपने कमरे में रहा करो चुपचाप, जन्माष्टमी में तुम्हें खीर चढ़ा देते हैं, ये कम है?

तुमने कुछ जाना है, समझा है ?

बात को समझ रहे हो ? इसको चुटकुले की तरह मत ले लेना कि बड़ा मज़ा दिलाया, आहा l थोड़ी बोरियत कम हुई l बात का अर्थ समझ रहे हो? जीवन में क्या कुछ भी है जो अपनी समझ से आ रहा है?

तुम भी नकली, तुम्हारा भगवान् भी नकली ! जो असली है, उसको तुम जान नहीं रहे l तो ऐसी ज़िन्दगी का फायदा क्या?

– ‘संवाद’ पर आधारित। स्पष्टता हेतु कुछ अंश प्रक्षिप्त हैं।

संवाद देखें: https://www.youtube.com/watch?v=vi87kmG4U6c