सौन्दर्य

  • जब आत्मा का नूर चहरे पर चमकता है, तब उसे सुंदरता कहते हैं। वही है वास्तविक सौंदर्य – सत्यं शिवं सुन्दरम्।”

 

  • क्या आपको सम्पूर्ण अकेलेपन का एक भी क्षण उपलब्ध होता है? वो अकेलापन जगत से भागने का नहीं है पर एक सरल, सुन्दर अकेलापन है |”

 

  • सब सुन्दर पत्ते, तना और शाख चाहते हैं पर जड़ों की बात नहीं करते |”

 

  • संसार प्यारा है क्योंकि सत्य का रूप है। संसार से सत्य की जितनी दूरी होगी, उतना ही प्रेम की संभावना कम होगी।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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