समस्या

  • समस्याएं अहंकार के लिए ही हैं।”

 

  • साहसी मन समस्या को नहीं, स्वयं को सुलझाता है।”

 

  • कुविचार: मेरी विचारणा से मेरी समस्या का समाधान हो जाएगा। सुविचार: विचारों की भीड़ और उनका द्वन्द ही तो समस्या है। गुरु: जो कुविचार छोड़ सुविचार की ओर ले जाये। कुविचार: मेरी विचारणा से मेरी समस्या का समाधान हो जाएगा। सुविचार: विचारों की भीड़ और उनका द्वन्द ही तो समस्या है। गुरु: जो कुविचार छोड़ सुविचार की ओर ले जाये। कुविचार: मेरी विचारणा से मेरी समस्या का समाधान हो जाएगा। सुविचार: विचारों की भीड़ और उनका द्वन्द ही तो समस्या है। गुरु: जो कुविचार छोड़ सुविचार की ओर ले जाये।”

 

  • हर विचार, हर वाक्य एक समस्या है जो सुलझी नहीं। सुलझाव मौन है। इसलिए समाधान शब्दों में व्यक्त नहीं हो सकता और ये बताया नहीं जा सकता कि ‘क्या समझा’ क्योंकि जो समझा वो ‘कुछ नहीं’ है। शून्यवत है।”

 

  • ” विरोध करके तुमने स्थिति को समस्या बना दिया।”

 

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उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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