सफलता

  • हज़ार में से नौ सौ निन्यानवे लोग इसलिए सफलता से दूर हैं क्योंकि नाकाबिल हैं | पर एक ऐसा भी है जो सफलता से दूर इसलिए है क्योंकि वह सफलता से आगे जा चुका है |”

 

  • आनंद सफलता की कुंजी है।”
  • “परमात्मा तुम्हारी सफ़लता में बिलकुल भी सहयोगी नहीं हो सकता। क्योंकि जो तुम्हें सफल बनाना चाहते हैं वो तुम्हें असफ़लता के भय में धकेलते हैं। परमात्मा भय नहीं देता, वो भय से मुक्ति देता है। इसी कारण वो तुम्हें सफ़लता और असफ़लता दोनों से मुक्ति देता है। वो तो तुमसे कहता है कि मौज में करोऔर भूलोकि इससे मिलेगा क्या, क्योंकि जो मिलना है वो मिला ही हुआ है। जो मिलना है वो मैं हूँ और मैं उपलब्ध हूँ, सदा उपलब्ध हूँ। करने में ही आनंद है, और उसी आनंद का नाम परमात्मा है। आनंद में ही कर रहे हैं, उसी करने का नाम परमात्मा है।”

  •  जिन्हें जीवन परम सफ़लता की मस्ती में बिताना हो, वो सफ़लता का प्रयास छोड़ दें। वो तो बस ज़रा बाहर की आवाज़ों को भुला कर के भीतर की आवाज़ को सुनें और फिर जब वो कहे कि करो’, तो कर डालें। रुकें ही न।”

 

——————————————————

उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

Leave a Reply