वर्तमान

  • सत्य ही वर्तता और वर्तमान ही सत्य।”
  • वर्तमान समय का क्षण नहीँ।” 
  • “जो है, वो यही है| रुकना है तो तत्क्षण रुको, इसी पल रुको| आगे सिर्फ आशा है और पीछे सिर्फ़ यादें हैं| रुकना या होना बस इसी पल है|”
  • “जहाँ कहीं भी भविष्य का इंतज़ार होगा, वर्त्तमान कड़वा हो जाएगा।”
  • जो भी कोई भविष्य के इंतज़ार में जी रहा है, वो अपने वर्त्तमान को कड़वा बना के रहेगा। और जो कोई वर्त्तमान में ही जी रहा है, उसके लिए वर्त्तमान ही मीठा है। उसे भविष्य चाहिए नहीं। उसके वर्त्तमान और भविष्य, दोनों मीठे हो जायेंगे।”
  • “वर्तमान में कोई लक्ष्य नहीं होता। जब तक लक्ष्य बनाओगे, वर्तमान बीत जाएगा। वर्तमान, बस जीना होता है।”
  • “योगी अकेला होता है, जो सिर्फ इस क्षण में जीता है| अभी रोंने का है ना, तो रोऊँगा| अभी हँसने का है ना, तो आगे-पीछे की चिंता कौन करे।”
  • “ज़मीन से एक होना सीखो। जहाँ पर हो, अगर वहाँ पर पूरी तरह हो लो, तो वहाँ से आगे के सौ रास्ते फूटेंगे।”
  • “अतीत में कैद रह कर के अतीत में ही रहोगे, बस एक कोने से दूसरे कोने कूदते रहोगे। वर्तमान अपनी सारी संभावनाओ के साथ तुम्हारे सामने है।”
  • “एक होशियार आदमी वो है, जो भविष्य में नहीं जीता, वर्तमान में जीता है। एक होशियार आदमी वो है, जो इच्छा में नहीं जीता, जो वर्तमान में जीता है, जिसको चाहतों से कोई लेना देना नहीं।”
  • “गलती वो नहीं जो आपने अतीत में करी थी। अतीत में जो हो गया, सो हो गया। अतीत में कोई गलतियाँ नहीं होती। गलती होती है मात्र वर्तमान में।”
  • “वर्तमान में अतीत की गलतियों के स्मृति अपने आप में एक बड़ी गलती है। वर्तमान में उपस्थिति नहीं, इससे बड़ी गलती क्या हो सकती है?”
  • “वर्तमान – वो है जिसकी उपस्थिति का एहसास भी न हो।”
  • “जो समय के पार चला गया, उसने शुरू कर दिया वर्तमान में जीना।”

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उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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