रूचि

  • जिस इंसान की धन इकट्ठा करने में बड़ी रूचि है, वो अंदर से दरिद्र है। आतंरिक दरिद्रता ही उससे धन इकट्ठा करवा रही है ।”

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    उपरोक्त सूक्तियाँ श्री प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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