मित्रता

  • दोस्त वो जो तुम्हें तुम तक वापस लाए।”

 

  • “व्यक्ति भी वही भला है, जिसकी संगति में तुम मौन हो सको। जान लो कि कौन तुम्हारा मित्र है, कौन नहीं। जिसकी संगति में तुम मौन हो सको, वो तुम्हारा दोस्त है। और जिसकी संगति में तुम अशांत हो जाओ, वो तुम्हारा दुश्मन है।”

 

  • “दोस्ती का मतलब है गहराई से एक दूसरे को समझना।”

 

  • “सिर्फ़ एक विकसित मन ही दोस्ती कर सकता है।”

 

  • “दोस्त कौन? जो मौजूद से ज्यादा मौजूद है पर जिसकी मौजूदगी अपना एहसास नहीं कराती हो|”

 

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उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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