मदद

  • हमारा संसार हमारी वृत्तियों का ही विस्तार है। इन वृत्तियों के प्रयत्न से मदद नहीं मिलेगी।”

 

  • “जो मदद सेवा ना हो, उसमें गहरा अहंकार है।”

 

  • “शराबी कौन? जिसे सबसे पहले अपना होश न हो। जिसे अपना होश न हो, वो दूसरे की मदद नहीं कर सकता । और जो होश में हो, वो जो कुछ भी करेगा, उससे दूसरे की मदद ही होगी। चाहे वो कोई लक्ष्य ले कर के कर रहा हो, या अपनी सहजता में कर रहा हो। वो जो भी करेगा वो दूसरों के लिए मददगार ही होगा|”

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उपरोक्त सूक्तियाँ आचार्य प्रशांत के लेखों और वार्ताओं से उद्धृत हैं

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